Monday, December 27, 2010

एक अंग्रजी मैं लिखी कविता ...


धर्म और छतरी


Religion or Umbrella

Some people

Assuming their own religion

As a small umbrella

Shelter under another religion

To hide their sorrows,

They are ignorant

Don’t know

Changing the religion

Will never transform their luck

Religion is not big or small

Religion is religion

---- विपिन चौधरी

---- विपिन चौधरी



Wednesday, December 22, 2010

Our computer crashed last month!


We purchased this computer just last ….how it crushed don’t know…one of the PC guy be-fooled that the data on folder C can’t be saved ….I stunned on that answer lots of my work was there …saved on that drive……because of my negligence….or laziness….while going out from city …once I felt to transfer it on another drive but I didn’t ….result…..it crushed. It took whole month to ask someone authentic pc expert...





Even doll in the house!

Luckily my son came to rescue me for the problem..Consoled me that ….I know some PC expert who can save your work in c drive….and it worked’’
Anyway, I finished the white shrug I started last month only. I will write the pattern. Ask someone …my niece or daughter to model for the shrug…for photo shoot and …will post all the picks with pattern very soon.
Hope all has a great day…..

Monday, December 20, 2010

बिटिया द्वारा लिखी एक कविता

सपनों की उड़ान

दुनिया के विस्तृत जाल में,
फड फड होते हैं हजारों सपनें,
व्याकुल पक्षियों की मानिंद,
कुछ है सुनहरें, कुछ नीलें-पीलें ।
हैं कुछ शोख , कुछ गंभीर,
आधे रंगीलें, आधे भडकीले ।
आतुर हैं गगन की उड़ान को,
सीखा नहीं इन्होनें द्दरा पर उतरना,
अरमान है केवल ऊँचा उडना,
आतुर है भेदनें को अम्बर,
अनोखे, निराले हैं ये सपनें,
कौन जानें इनका ठिकाना ।
किस मजिंल पर है इनको जाना,
कौन जानें इनकी अन्तिम परिणती ।
दिखलातें कभी दृश्य
अनदेखा, अन्जाना ।
कभी दिखलाते
वास्विकता से परें की घटना ।
हैं क्या ये, मात्र छलावा,
क्हाँ से पाते ये संस्कार,
मनुष्य पागल करता इस पर विचार ।
अरें छोडों, रहनें दों
विचारों को बहनें दो ।
सपनें हैं,
अपनें हैं ।
शब्बा खैर!

Monday, November 1, 2010

अपना बैग लेकर बाज़ार जाऐं

पर्यावरण बचाएं, पहल करें------

पिछले दिनों मिडिया में काफी हो- हल्ला था बंद करो- पोली-बैग बंद करो, पोली-बैग से ये खराबा हूआ- और वो खराबा हूआ। हरियाणा में जिस दिन अखबार में आया कि पोली-बैग बैन हो गये हैं। अगले दिन सचमुच फलों की रेहङी वाले ने पोली-बैग में फल दिये ही पंसारी ने सामान में दिया, सोचा अबकी-बार तो सचमुच कुछ कठोर कदम उठे हैं, लगता है पोली-बैग का ज़माना लदने वाला है, यदि भूल-वश कहीं अपना थैला खरिदारी करने जाते समय नहीं ले गये तो बिना खरिदारी करे ही वापिस लौटना पङेगा। पर फिर वही हर दूकान-रेहङी पर पोली-बैग में सामान आसानी से बिना किसी ना नुकर के मिल रहा था।



यह बैग मैंने पिछले दिनों बेटी के लिये बनाया....
अपनी पुरानी साड़ी से बनाये उसके सूट के साथ मैच हो गया.
साड़ी से सूट बनाते समय कुछ कतरन बच गई थी ...जिन्हें इस्तेमाल कर यह बड़ा सा शोपिंग बैग बहुत ही सुन्दर बन गया है.
क्मीज और चुन्नी साड़ी की बनाकर उसे मेचिंग चुरिदार से टीम कर दिया और फिर यह बैग....मेचिंग....
अब इतना बड़ा बैग साथ ले जाकर साड़ी खरीदारी का सामान इसमें आसानी से भरें और घर आयें कोई फटने का डर नहीं...