Showing posts with label NGO Work. Show all posts
Showing posts with label NGO Work. Show all posts

Friday, August 7, 2026

NGO के सेंटर में क्रोशिया के साथ सुकून भरे लम्हे

 सेंटर में क्रोशिया के साथ सुकून भरे लम्हे

जब काम की व्यस्तता और थकान महसूस हो, तो क्रोशिया (Crochet) बनाना मन को बेहद शांति देता है। पूरा हफ्ता कई कामों में बीतने के बाद ऊर्जा कुछ कम थी, लेकिन हमारी एनजीओ (NGO) के सिलाई, कढ़ाई और शिल्प केंद्र पर दो घंटे की सुपरविज़न के लिए जाना भी ज़रूरी था। इसलिए मैंने केंद्र पर बैठकर एक ही रंग के धागे से 'पाइनएप्पल पैटर्न' का क्रोशिया बैग बनाना शुरू किया।

इंटरनेट पर देखा गया पाइनएप्पल पैटर्न बैग


कुछ सप्ताह पहले इंटरनेट पर मुझे यह डिज़ाइन दिखा था। इसे देखकर ही मेरे मन में इसे बनाने की इच्छा जागी। मैंने घर में बचे हुए एक ही रंग के अपने मनपसंद ऐक्रेलिक धागों को निकाला और बैग बुनना शुरू कर दिया।

क्रोशिया से बनता हुआ बैग


बाद में पता चला कि यह डिज़ाइन एक चीनी वेबसाइट पर उपलब्ध था। हालाँकि मुझे इसका लिंक याद नहीं रहा, लेकिन फोटो देखकर पैटर्न समझकर लिखना और बनाना मेरे लिए बहुत आसान था।

केंद्र में सिलाई का प्रशिक्षण लेती महिलाएं




सेंटर पर बैठकर जब महिलाएं सिलाई-कढ़ाई सीख रही थीं, तब क्रोशिया का हुक हाथ में थामे मुझे बेहद सुकून मिला। जैसे-जैसे डिज़ाइन आगे बढ़ता, हर दो-तीन टांके बाद इसे देखना पड़ता। क्रोशिया की सादगी में एक अनोखा आकर्षण है, जो मन को एकाग्र और शांत कर देता है। बचपन से ही मुझे बुनाई (Knitting) का शौक था, क्रोशिया तो मैंने बाद में सीखा, लेकिन अब यह मेरी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बन चुका है।

 इंस्ट्रक्टर द्वारा कुर्ते की ड्राफ्टिंग और कटिंग सिखाना


कुर्ते की ड्राफ्टिंग और कटिंग सिखाती इंस्ट्रक्टर और आपस में बातचीत करती महिलाओं को देखते हुए मैंने बीच-बीच में कुछ तस्वीरें भी खींच लीं।

सिल कर तैयार हुई कमीज


क्रोशिया करते हुए मेरा मन अक्सर बचपन की यादों में चला जाता है। मुझे अपनी चाचियों और मौसियों से क्रोशिया सीखना याद आ जाता है। गर्मियों की दोपहरों में और रात को घर के आंगनों व दालान में बैठकर वे चुन्नियों पर सुंदर पीकोट (Picot) एजिंग, पाइपिंग, गोटा-पट्टी और कसीदाकारी किया करती थीं। हरियाणा में शादी के बाद ससुराल पक्ष के लिए 50 से 100 'तील' (सूट) ले जाने का रिवाज हुआ करता था, और हर तील की चुन्नी पर बहुत बारीक और सुंदर हाथ का काम होता था।

रेनू द्वारा अपनी माँ के लिए सिला गया कुर्ता

इसी दौरान मुझे अपनी दादी-पाटो (मेरी माँ की चाची) की याद आती है। वे बहुत ही ऊंचे-पूरे कद की, ज़िंदादिल और हंसमुख महिला थीं। जब भी वे किसी से मिलने आतीं, चाय पीते-पीते हाथ का नाप लेतीं और देखते ही देखते उंगलियों के बिना वाले दस्ताने (Fingerless Gloves) बुनकर तैयार कर देती थीं। वे मेरे जीवन में देखी गई सबसे तेज़ क्रोशिया करने वाली महिला थीं।

मेरी एक और रिश्तेदार भी थीं, जिन्हें कढ़ाई का बहुत शौक था। वे हमेशा चाहती थीं कि मेरे लिए भी कुछ कढ़ाई करें, लेकिन मुझे अपने हाथ से काम करना ही पसंद था। उन्होंने मुझसे चिड़ियों वाली एक वॉल-हैंगिंग पर रेशमी धागों से बारीक कढ़ाई शुरू करवाई थी, जिसे मैं कभी पूरा नहीं कर सकी। बारीक सुई और पतले धागों से धीमी कढ़ाई करना मेरे बस का काम नहीं था।

मुझे ऐसा क्रोशिया बनाना ही अच्छा लगता है जिसमें बहुत ज़्यादा सतर्कता न बरतनी पड़े। भले ही इस पाइनएप्पल डिज़ाइन में थोड़ा ध्यान देना पड़ता है, फिर भी यह बहुत सुंदर लग रहा है। मैंने तय किया है कि अपनी सभी 8 भान्जियों और भतीजियों के लिए अलग-अलग रंगों में ऐसा ही एक-एक बैग बनाऊँगी।


XOXO